Friday, Dec 14, 2018
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जम्मू कश्मीर में राज्यपाल द्वारा भंग की गई विधानसभा के खिलाफ बोले भाजपा नेता, कहा- भले ही हमारी पार्टी से हो लेकिन ये सही नहीं किया

हाल ही में जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीडीपी की गठबंधन वाली सरकार कुछ साल शासन के बाद उस समय गिर गई थी जब दोनों पार्टियों के बीच दरार बढ़ गयी थी और गठबंधन टूट गया था। इसके बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए पीडीपी ने एनी दलों के साथ बातचीत कर जैसे ही सरकार बनाने का दावा पेश किया तो राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी और इसके बाद एक अजीबो गरीब सफाई दी जिसको लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

राज्यपाल के इस कदम पर भाजपा सदस्य डोक्टर गगन भगत ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी है। जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए भगत ने कहा, ‘राज्यपाल भले ही हमारी पार्टी के है लेकिन उन्होंने विधानसभा भंग कर सही नहीं किया। भाजपा के सभी विधायक चाहते है कि सदन पहले की तरह बहाल हो लेकिन वे खुलकर सामने नहीं आए।’

भगत ने कहा, ‘राज्यपाल का फैसला असंवैधानिक है. मुझे विश्वास है कि कोर्ट सदन को फिर से बहाल करेगा। जिस तरीके से उन्होंने यह काम किया है वह उनके पद की गरिमा के अनुसार नहीं है। भले ही वे हमारी पार्टी के हो लेकिन उन्हें संवैधानिक तरीके से कार्य करना चाहिय था।’ पार्टी छोड़ने और पार्टी के खिलाफ जाने संबंधी सवाल पर भगत ने कहा, ‘मैंने पार्टी को बता दिया है कि ये मेरा मौलिक अधिकार है और मैं सवाल करूंगा। पार्टी ने किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है क्योकि सभी विधायक चाहते है कि सदन फिर से बहाल हो जाए।’

भगत ने कहा, ‘दो पार्टिया सरकार बनाने के लिए आगे आई थी, लेकिन राज्यपाल ने 15 मिनट के अंदर विधानसभा को ही भंग कर दिया। कायदे से ये होना चाहिए था कि उन्हें अगले दिन पार्टियों की बैठक बुलाकर फ्लोर टेस्ट करवाना चाहिए था। यदि इस टेस्ट में बहुमत साबित नहीं होता तब विधानसभा को भंग करना चाहिए था। हम इस असंवैधानिक फैसले का विरोध करते है। अतीत में हुई इस तरह की गलतियों से हमने सबक सीखा है, इसके बावजूद फिर से ऐसा किया गया।’ उन्होंने राज्यपाल द्वारा पीडीपी, एनसी और कांग्रेस के गठबंधन को अपवित्र बताने पर कहा, ‘यह अजीब तर्क है जब भाजपा पीडीपी के साथ गई थी तब यह पवित्र गठबंधन था! सभी मायनो में एक दूसरे से अलग थे। हमारे में कुछ भी कॉमन नही था। दुनिया को देखने का हमारा नज़रिया अलग-अलग था, लेकिन हम साथ आये और सरकार बनाई। ऐसी स्थिति में पीडीपी, एनसी और कांग्रेस के बीच का गठबंधन अलग कैसे है?’

वही इस पर भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री कवींद्र गुप्ता ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट में भगत के द्वारा दायर की गई याचिका उनका अपना निजी फैसला है। पार्टी के तौर पर भाजपा ने राज्यपाल के फैसले का विरोध नहीं किया है। राज्यपाल को जो करना था, उन्होंने किया। अब हमें आगे बढ़ने की ज़रुरत है। भंग किये सदन में के सभी भाजपा विधायक पार्टी के साथ थे।’

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