Tuesday, Mar 19, 2019
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गुजरात: वर्षो से भाजपा सरकार, कम नहीं हो रहे दलितों के खिलाफ क्राइम, पांच साल में दलितों के खिलाफ 25% तो एसटी के खिलाफ 55% बढ़ा

gujarat dalit oppression

देश के प्रधानमंत्री बन्ने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। गुजरात में पिछले कई वर्षो से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है। राज्य में लंबे समय से भाजपा की सरकार होने के बावजूद गुजरात में दलितों और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ क्राइम के मामलो में कमी आने के बजाए बढौतरी ही हुई है। खबर है कि राज्य में वर्ष 2013 से 17 तक दलितों के खिलाफ 32% और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ क्राइम 55% बढ़ गया है।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस विधायक ने सितंबर 2018 में सवाल पूछा था जिसमे जवाब में अब गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ईश्वर परमार विधानसभा सत्र के दौरान एक रिपोर्ट पेश की है। उन्होंने बताया कि 2013 से 17 तक एससी और एसटी एक्ट के तहत कुल 6185 केस दर्ज किए गये। इस सभी मामलो में दलित पीड़ित थे।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 में दलित उत्पीड़न के 1147 केस दर्ज हुए थे और 2017 में दलित उत्पीड़न से संबंधित 1515 मामले दर्ज किये गये। 2018 की बात करें तो मार्च तक दलित उत्पीड़न के 414 मामले सामने आए इनमे से सबसे ज्यादा केस अहमदाबाद (49) दर्ज हुए जिसके बाद जूनागढ़ (34), भावनगर (25), सुरेंद्रनगर (24) और बनासकांठा (23) का नाम आता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ क्राइम की बात करें तो वर्ष 2013 से 17 के दौरान अनुसूचित जनजातियो के खिलाफ क्राइम के मामले 55 प्रतिशत बढ़कर 1310 तक पहुच गये। इसके अलावा साल 2018 के पहले 3 तीन महीनो में ही ऐसे 89 मामले दर्ज हुए, जिसमे अनुसूचित जनजाती के लोग पीड़ित थे। इनमे सबसे ज्यादा केस भरूच (14), वडोदरा (11) और पंचमहल (10) में दर्ज हुए।

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