Friday, Dec 14, 2018
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अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में आई कमी, आने वाला समय मोदी सरकार के लिए हो सकता है और भी मुश्किल

देश में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देकर सत्ता में आई मोदी सरकार के लिए बीता कुछ समय अच्छा नहीं गया और आने वाला समय भी परेशानियों से भरा होने वाला है। ऐसा हम नहीं बल्कि सामने आए अर्थव्यवस्था के आकडे बता रहे है। खबर आ रही है कि अर्थव्यवस्था अब पहले से ज्यादा धीमी गति से आगे बढ़ रही है।

जनसत्ता पर रायटर्स के एक सर्वे के हवाले से छपी रिपोर्ट के अनुसार,जुलाई-सितंबर क्वार्टर में 7.4 फीसदी का ग्रोथ सालाना विकास दर के पैरामीटर पर कमज़ोर हो सकता है। और जैसे-जैसे चुनाव की तारिख करीब आती जाएगी वैसे वैसे विकास दर में कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि पिछले दो वर्षो का रिकॉर्ड तोड़ते हुए जून क्वार्टर में अर्थव्यवस्था ने 8.2 फीसद का आकड़ा छू लिया था. मगर भले ही वर्तमान में विकास दर चीन की तुलना में बेहतर है लेकिन भारत को इस समय 8 फीसद से अधिक विकास दर की आवश्यकता है।

इस रिपोर्ट में इकनोमिक टाइम्स के हवाले से बताया गुआ कि वर्तमान वित्त वर्ष के दुसरे पड़ाव में विकास दर के और कम होने की सम्भावना है। एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि यदि इस बीच कोई बड़ी राजनीतिक अनिश्चितता खड़ी होती है। तो यह सीधे-सीधे बाज़ार और व्यापार पर असर डालेगी। इस समय विकास दर खराब नहीं है लेकिन मसला इसके लगातार नीचे गिरते हुए ट्रेंड से फस रहा है। भारत में हर वर्ष 1 करोड़ 20 लाख के करीब युवा वर्ग हर वर्ष नौकरी की मांग कर रहा है और भारत को इस समय 8 फीसदी से अधिक विकास दर की आवश्यकता भी है जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट के अनुसार मुंबई स्थित ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकॉनमी’ (CMIE) के मुताबिक अक्टूबर माह में बेरोज़गारी दर 6.9 फीसद के हिसाब से बढ़ी जो पिछले दो वर्षो के मुकाबले ज्यादा थी। विकास दर्म में कमी के पीछे कमज़ोर होता रुपया, बैंको की खस्ता हालत के कारण गिरता व्यापार, आदि जैसे और भी कई बड़े और गंभीर कारण है। गौरतलब है कि आरबीआई ने मार्च तक देश की विकास दर 7.4 फीसद होने की भविष्यवाणी की है।

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