Tuesday, May 21, 2019
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पिछले पांच वर्षो में ग्राहको से बैंको ने वसूला मोटा शुल्क, कमाई के अकड़े देख आँखे खुली की खुली रह जाएंगी

indian bank system

कुछ वर्षो से बैंको की कमाई में काफी बढौतरी दर्ज की गई है। ग्राहकों पर अलग-अलग तरह के शुल्क भार लगा कर बैंको ने अपना खज़ाना भरा है और अब जानकारी प्राप्त हुई है कि इस रेस में निजी बैंको से ज्यादा सार्वजानिक क्षेत्रो के बैंक आगे निकल गये है। वित्तीय वर्ष 2013-14 से अब तक बैंको की कमाई का आकड़ा सामने आया है जो आपके होश उड़ा देगा। बैंको ने इस दौरान लाखो करोड़ रूपए वसूले है।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहकों से एटीएम से पैसे निकलने, जमा करने और मोबाइल सुविधाओं के पर शुल्क वसूला जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2013-14 से अब तक बैंको ने दो लाख 88 हज़ार करोड़ रूपए से ज्यादा की राजस्व वसूली की है जिसमे निजी बैंको ने एक लाख 12 हज़ार करोड़ रुपय तो सार्वजानिक क्षेत्र के बैंको ने एक लाख 76 हज़ार 278 करोड़ रूपए की वसूली की। वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2017-18 और एक अप्रैल 2018 से 30 सितंबर 2018 के दौरान सार्वजानिक और निजी क्षेत्रो के बैंको द्वारा रिपोर्ट किये गये अन्य परिचालन आय शुल्क में आय में कमीशन, एक्सचेंज और ब्रोकरेज भी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2013-14 में सार्वजानिक बैंक ने 28374 करोड़ रूपए, निजी बैंक ने कमाए 21172 करोड़ रूपए कमाए. वर्ष 2014-15 में सार्वजानिक बैंक ने 29174 करोड़ रूपए, निजी बैंक ने 16091 करोड़ रूपए कमाए, वर्ष 2015-16 में सार्वजानिक बैंक ने 31143 करोड़ रूपए, निजी बैंक ने 18244 करोड़ कमाए, वर्ष 2016-17 में सार्वजानिक बैंक ने 34927 करोड़ रूपए, निजी बैंक ने 20133 करोड़ रुपय कमाए, वर्ष 2017-18 में सार्वजानिक बैंक ने 36219 करोड़ रूपए, निजी बैंक ने 23409 करोड़ रूपए कमाए, वर्ष 2018 तक सार्वजानिक बैंक ने 16441 करोड़ रुपया और निजी बैंक ने 13475 करोड़ रूपए कमाए है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार आरबीआई की ओर से बताया गया कि क्षेत्रिये ग्रामीण बैंको को छोड़कर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंको को उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के अनुसार विभिन्न प्रकार की सेवाओं पर सेवा प्रभार तय करने की स्वतंत्रता दी गई है। हालांकि आरबीआई का कहना है कि नियम के अनुसार सेवा प्रभार तय करते समय बैंको को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रभार उचित हो और औसत लागत से अधिक न हों।

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